Guru Virjanand Gurukul Mahavidyalaya, Kartarpur

(Affiliated to - Central Sanskrit University, New Delhi)

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PRESIDENT'S MESSAGE

president

मातृवान् पितृवान् आचार्यवान् पुरुषोवेद अर्थात् बच्चे के तीन गुरु कहलाते है । पहली माता, दूसरा पिता, तीसरा आचार्य आधुनिक शिक्षा प्रणाली में इन तीनों ही गुरुओं का अभाव सा प्रतीत होता है । क्योंकि वर्तामान में न ही माता पिता के पास समय है और न ही योग्य आचार्यों का बच्चे के सर्वांगीण में योगदान है परन्तु वर्तमान में मूल्य परक, गुणवत्ता परक, आचार युक्त, राष्ट्र,- मातृ- पितृभक्ति परक शिक्षा से ही बच्चों का ही सर्वांगीण विकास सम्भव है और इसी प्रकार के कार्यों को क्रियान्वित करने हेतु ऋषि दयानन्द प्रणीत गुरुकुल परम्परा एक उत्तम विकल्प है । प्राचीन काल की शिक्षा परम्परा में गुरुकुलों में निर्धन एवं अमीर के बालक एक ही साथ पढ़ते थे और इस प्रकार की शिक्षा में जातिवाद का भी महत्व नहीं था, परन्तु वर्तमान समय में शिक्षा में इस प्रकार की शिक्षा का अभाव सा दिखाई देता है, आज योग्य विद्यार्थी को भी उच्चत्तर शिक्षा धन के अभाव में नहीं मिल पा रही है । इसी विषय को कवि मैथिली शरण गुप्त लिखते है कि पढ़ते हजारों शिष्य थे पर फीस ली जाती नहीं । वह उच्च शिक्षा तुच्छ धन पर बेच दी जाती नही ।। उसी गुरुकुल परम्परा का अनुसरण हम करने का प्रयत्न कर रहे है । गुरु गुरुकुल महाविद्यालय, करतारपुर बच्चों के सर्वागीण विकास हेतु प्रयत्नशील है इसलिए निःशुल्क की परम्परा पालन करते हुए गुरुकुल द्वारा सभी छात्रों को निःशुल्क प्रदान करती है । सत्र 2026-27 की नियमावली प्रकाशित हो रही है । इस अवसर पर नए एवं पुराने छात्रों का हार्दिक स्वागत अभिनन्दन एवं शुभकामनाएँ प्रदान करता हूँ तथा यह आशा करता हूँ कि गुरुकुल का प्रत्येक छात्र अध्ययन उपरान्त आर्य राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभायेंगें ।

अध्यक्ष

ध्रुव कुमार मित्तल

गुरु विरजानन्द स्मारक समिति ट्रस्ट,

करतारपुर-144801 जिला-जालन्धर (पंजाब)