Guru Virjanand Gurukul Mahavidyalaya, Kartarpur

(Affiliated to - Central Sanskrit University, New Delhi)

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News & Updates
गुरु विरजानन्द गुरुकुल महाविद्यालय करतारपुर आगामी कार्यक्रम
  • 1. स्वामी दयानन्द जयंती १२ फरवरी २०२६ (उत्सव गुरुकुल में)
  • 2. अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस ८ मार्च २०२६ (उत्सव गुरुकु में)
  • 3. नव वर्ष २० मार्च २०२६ (उत्सव गुरुकुल में)
  • 4. वार्षिक परीक्षा २० मार्च से १५ मई २०२६
  • 5. प्रवेश परीक्षा नए छात्रों हेतु ५ अप्रैल २०२६
  • 6. ग्रीष्मकालीन अवकाश १० मई से १५ जून २०२६
  • 7. विद्यायलय कक्षा प्रारम्भ १५ जून २०२६ से (कक्षा पूर्व मध्यमा से शास्री पर्यन्त )

Welcome Note

करतारपुर आर्य समाज के प्रवर्तक महर्षि दयानन्द सरस्वती के महान गुरु दण्डी स्वामी विरजानन्द सरस्वती जन्मथली है । दण्डी स्वामी श्री गुरु विरजानन्द एक अद्वितीय और सर्वोत्कष्ट प्रतिभा के धनी थे । वे ह्रदय अन्तस्तल से सच्चे राष्ट्र भक्त तथा वैदिक सभ्यता और संस्कृत के समुद्घोषक थे उन्होंने क्रान्तिशील पग उठाये और वेदों तथा आर्ष साहित्य की तर्क संगत अवधारणा प्रस्तुत की राष्ट्र सेवा में उनका सबसे बड़ा योगदान यह था कि उन्होंने ऋषि दयानन्द जैसा शिष्य तैयार किया जिसने गुरु के रुप में वैदिक संस्कृति और आर्ष. साहित्य के प्रचार-प्रसार में के अपना समस्त जीवन दान कर दिया । करतारपुर दिल्ली. जालन्धर अमृतसर मेन रेलवे लाईन तथा जी.टी रोड़ पर जालन्धर से 16 कि.मी. दूरी पर स्थित है । महान् गुरु विरजानन्द की पवित्र स्मृति में "श्री गुरु विरजानन्द गुरुकुल " के नाम से करतारपुर में सन् 1970 से एक गुरुकुल कार्यशील है । यह एक आवासीय संस्था है जिसमें सारे ब्रह्मचारी तथा प्राय: सभी अध्यापक गुरुकुल के परिसर में ही रहते हैं। पुरातनभारतीय सांस्कृतिक परम्परा के अनुसार यह गुरुकुल न केवल शिक्षा ही निःशुल्क प्रदान करता है, अपितु यहाँ आवास और भोजन की व्यवस्था भी निःशुल्क है और इस तरह इस गुरुकुल के सभी वर्गों और श्रेणियों के ब्रह्मचारी चाहे धनी हों चाहे निर्धन एक समान भाव से उसी तरह रहते और पढ़ते हैं जैसे¬- प्राचीन काल में महर्षि सान्दीपनी के गुरुकुल में ब्रह्मचारी रहते थे । जहाँ कृष्ण और सुदामा इकट्ठे रहते और पढ़ते थे। यह गुरुकुल केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, दिल्ली के साथ सम्बद्ध है और जो ब्रह्मचारी यहाँ छठी कक्षा में प्रवेश ग्रहण करते हैं उन्हें पन्द्रहवीं कक्षा तक अध्ययन करने के उपरान्त वेदालंकार-विद्यालंकार के प्रमाण पत्र जो बी.ए. के समकक्ष हैं केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय द्वारा प्रदान किये जाते हैं। वर्तमान में इस गुरुकुल में लगभग 230 ब्रह्मचारी विद्या प्राप्त कर रहें हैं। प्राचार्य सहित यहाँ आचार्यों की संख्या 15 है। ये सभी आचार्य अत्यन्त शिक्षित तथा ब्रह्मचारियों के भविष्य निर्माण में समुचित मार्गदर्शन करने में पूर्ण सशक्त हैं । इस गुरुकुल में केवल वैदिक शास्त्रों और कर्मकाण्ड का ही प्रशिक्षण नहीं दिया जाता अपितु अंग्रेजी विज्ञान, गणित और समाज शास्त्र, दर्शन शास्त्र और राजनीति तथा कम्प्यूटर का प्रशिक्षण दिया जाता है जो आधुनिक शिक्षण संस्थाओं के शैक्षिक स्तर के अनुरूप हैं। हमारा दावा है कि हमारे ब्रह्मचारियों का सभी विषयों में ज्ञान का स्तर अत्यन्त उत्तम है। इस गुरुकुल में भारत के लगभग सभी प्रदेशों से ब्रह्मचारी शिक्षा प्राप्त करने के लिए आते हैं और इस तरह यह गुरुकुल एक लघु भारत का दृश्य प्रस्तुत करता है । अधिकांश ब्रह्मचारी देश के उन भू भागों से हैं जहाँ ईसाई मिशनरी उनकी दरिद्रता का लाभ उठाकर उन्हें मुफ्त शिक्षा और भविष्य में उच्च पदों कर प्रलोभन देकर उनका धर्मोतरण करने में लगे हैं । सामान्यतः लोग अपनी संस्कृति और अपने धर्म को बचाने की इच्छा करते हैं यदि उन्हें इस रुप में कहीं कोई अन्य विकल्प दिखाई दे जाये। यह विकल्प मात्र हमारी संस्था ही प्रदान करती है तथापि हमारे गुरुकुल द्वारा ऐसे शिक्षार्थियों को प्रवेश प्रदान करने और भोजन आदि की निःशुल्क व्यवस्था करने में स्थान और धनराशि की पर्याप्त मात्रा नहीं है । वर्तमान वित्तीय स्त्रोतों तथा उपलब्ध स्थान को दृष्टिगत करते हुए हम अपने गुरुकुल में 300 ब्रह्मचारियों से अधिक को प्रवेश दे पाने स्थिति में नहीं हैं इस गुरुकुल की किसी प्रकार की कोई निश्चित आय नहीं है । इस स्थिति में केवलदानी सज्जनों द्वारा प्रदान की गई दान राशि से चल रहा है। वे सज्जन धर्मान्तरण करने वाले मिशनरियों के चुंगुल से निर्धन वर्ग के शिक्षार्थियों को छुड़ाकर इस गुरुकुल शिक्षा में सत्सहयोग देकर एक अत्यन्त पुण्य का कार्य कर रहे हैं । ब्रह्मचारियों में वाद विवाद तथा भाषण प्रवचनादि कला के विकास के लिए विशेष प्रयास किये जाते हैं। जिससे वे उत्तम उपदेशक और पुरोहित बन सकें। इस के लिए वाग्वर्धिनी परक गीतिकाएँ, श्लोक, हिन्दी अंग्रेजी और संस्कृत में प्रवचन आदि प्रस्तुत करते हैं यह में वाग्वर्धिनी गुरुकुल के प्राचार्य की अध्यक्षता में होती है । ब्रह्मचारियों को उत्तम दूध घी आदि प्रदान करने के लिए गुरुकुल की अपनी गौशाला है जिससे ब्रह्मचारियों की घी दूध आदि की समस्त आवश्यकता की पूर्ति होती है । यहाँ के छात्रअन्तर्विद्यालयीय अन्तर्विश्वविद्यालय संस्कृत तथा अन्य प्रतियोगिताओं में जाते हैं। इससे इनकी प्रतिभा का विकास होता है समसामायिक विषयों पर परिचर्चा हेतु इससे छात्रों को अन्य विषयों को भी जानकारी प्राप्त होती है ।

संक्षेप में हम ऋषि दयानन्द के अनुरुप शिक्षा देने का प्रयत्न कर रहे हैं तथापि हम आपके गुरुकुल के विकास हेतु परामर्श चाहते हैं । आईये मिलकर इस भू.भाग से योग्य छात्रों का निर्माण कर श्रेष्ठ भारत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाये ।

About Us

Kartarpur is the birthplace of Dandi Swami Virjanand Saraswati, the great Guru of Maharshi Dayanand Saraswati, the founder of Arya Samaj. Dandi Swami Shri Guru Virjanand was a unique and supremely talented person. He was a true patriot from the core of his heart and a propagator of Vedic civilization and Sanskrit. He took revolutionary steps and presented a logical concept of Vedas and Arsha literature. His biggest contribution to the service of the nation was that he prepared a disciple like Rishi Dayanand who, as a Guru, devoted his entire life to the propagation of Vedic culture and Arsha literature. Kartarpur is located 16 km from Jalandhar on the Delhi-Jalandhar Amritsar main railway line and GT road. In the sacred memory of the great Guru Virjanand, a Gurukul named "Shri Guru Virjanand Gurukul" is functioning in Kartarpur since 1970.

about-us

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अध्यक्ष सन्देश

मातृवान् पितृवान् आचार्यवान् पुरुषोवेद अर्थात् बच्चे के तीन गुरु कहलाते है । पहली माता, दूसरा पिता, तीसरा आचार्य आधुनिक शिक्षा प्रणाली में इन तीनों ही गुरुओं का अभाव सा प्रतीत होता है । क्योंकि वर्तामान में न ही माता पिता के पास समय है और न ही योग्य आचार्यों का बच्चे के सर्वांगीण में योगदान है परन्तु वर्तमान में मूल्य परक, गुणवत्ता परक, आचार युक्त, राष्ट्र,- मातृ- पितृभक्ति परक शिक्षा से ही बच्चों का ही सर्वांगीण विकास सम्भव है और इसी प्रकार के कार्यों को क्रियान्वित करने हेतु ऋषि दयानन्द प्रणीत गुरुकुल परम्परा एक उत्तम विकल्प है ।

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प्राचार्य सन्देश

संसार का उपकार करना इस समाज का मुख्य उद्देश है अर्थात् शारीरिक आत्मिक और सामाजिक उन्नति करना ऋषि दयानन्द द्वारा प्रणीत यह वाक्य वर्तमान में सभी शिक्षाविदों के लिए चिन्तनीय है क्या वर्तमान में इस प्रकार की शिक्षा प्रणाली उपलब्ध है । जो बच्चों का शारीरिक, आत्मिक एवं सामाजिक विकास करती हो । आज का युग विज्ञान युक्त बात को करता है परन्तु उसके अन्दर आत्मविश्वास का भी अभाव प्रतीत होता है ।

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आचार्य देवव्रत जी संदेश

गुरु विरजानन्द जी की जन्मभूमि में कार्यरत गुरु विरजानन्द गुरुकुल महाविद्यालय, करतारपुर निरंतर 50 वर्षों से संस्कृत अध्यापन में प्रवृत्त है। वर्तमान में भी लगभग 200 जितने विद्यार्थियों के पठन पाठन भोजन- आवास आदि की व्यवस्था की जा रही है। ऐसी व्यवस्था वन्दनीय है और समाज के लिए आशीर्वाद समान है। वर्तमान समय में संस्कृत का अध्यापन अनिवार्य

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प्रों श्रीनिवास वरखेड़ी जी संदेश

महर्षेः दयानन्दसरस्वत्याः गुरुः गुरुविरजानन्दसरस्वत्या: जन्मस्थल्यां करतारपुरस्थः गुरुविरजानन्दगुरुकुलमहाविद्यालयः विगतेभ्यः नैकेभ्यः वर्षेभ्यः संस्कृतजगति कार्यं कुर्वन् वर्तते । इदं विज्ञाय अत्यन्तं प्रसन्नतामनुभवाम्यहं यत् गुरुकुलमहाविद्यालयस्यास्य नैकाः उत्तमोत्तमाः स्नातकाः संस्कृतजगति स्वीयां सेवां कुर्वाणाः वर्तन्ते ।

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